प्रख्यात स्तंभकार · लेखक · राष्ट्रवादी विचारक · हिंदी दूत
संरक्षक: बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना | पूर्व सदस्य: राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार
"हिंदी केवल एक भाषा नहीं, यह हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है — इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) की आधिकारिक भाषा बनाना हमारा जीवन-संकल्प है।"
"डॉ. बिपिन कुमार जी का जीवन हिंदी और भारतीय संस्कृति के वैश्विक पुनरुत्थान के लिए पूर्णतः समर्पित है। उनका सांगठनिक कौशल और राष्ट्र सेवा का अटूट संकल्प अत्यंत अनुकरणीय है।"
"राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की वैचारिक चेतना को आधुनिक युग में आगे बढ़ाने का जो पुनीत कार्य डॉ. बिपिन कुमार कर रहे हैं, वह साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर है।"
"वियतनाम में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता एवं दोहरा विश्व रिकॉर्ड डॉ. बिपिन कुमार जी के दृढ़ संकल्प और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है।"
डॉ. बिपिन कुमार जी ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय मूल्यों और मातृभाषा के स्वाभिमान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
दशकों से हिंदी भाषा, देवनागरी लिपि और सनातन सांस्कृतिक परंपराओं के संवर्धन हेतु देश-विदेश में अनवरत जनजागरण और युवा मार्गदर्शन।
मॉरीशस (11वां WHC), फिजी (12वां WHC), वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में भारतीय प्रवासियों व विदेशी हिंदी अध्येताओं को एकजुट करने का नेतृत्व।
विश्व हिंदी परिषद का 22 राज्यों में सशक्त विस्तार, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का संरक्षण तथा भारत सरकार की राजभाषा पुस्तक चयन समिति में सेवा।
हो चि मिन्ह सिटी, वियतनाम में अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन 2024 के संयोजन हेतु 'वियतनाम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' से सम्मानित।
हो चि मिन्ह सिटी में 15 देशों के प्रतिनिधियों के साथ भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का संयोजन। 'वियतनाम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' व 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' द्वारा दोहरा सम्मान।
विस्तार से पढ़ेंकेंद्रीय मंत्रालयों एवं सार्वजनिक उपक्रमों के लिए उच्च गुणवत्तापूर्ण हिंदी ग्रंथों के चयन में निर्णायक भूमिका एवं 'हिंदी और समाज' पुस्तक का लोकार्पण।
विस्तार से पढ़ेंप्रशांत महासागरीय द्वीप फ़िजी में गिरमिटिया प्रवासियों के साथ संवाद और रामचरितमानस की विरासत पर ऐतिहासिक शोध व्याख्यान।
विस्तार से पढ़ें"हिंदी केवल एक भाषा नहीं, यह हमारे राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति है — इसे विश्व पटल पर सर्वोच्च गौरव दिलाना हमारा पावन संकल्प है।"
विश्व भर में 150 से अधिक देशों में बोली जाने वाली हिंदी को 7वीं आधिकारिक भाषा का गौरव दिलाने का विस्तृत रोडमैप।
पूरा आलेख पढ़ेंमातृभाषा में प्राथमिक व तकनीकी शिक्षा से ही विद्यार्थियों की मौलिक प्रतिभा का प्रस्फुटन संभव है।
पूरा आलेख पढ़ेंमॉरीशस और फिजी के विश्व सम्मेलनों के आधार पर प्रवासी भारतीयों के भाषाई अनुराग का गहन विश्लेषण।
पूरा आलेख पढ़ेंहो चि मिन्ह सिटी में अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के संयोजन हेतु 'वियतनाम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' एवं 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' से सम्मानित।
समाचार पढ़ेंविश्व हिंदी दिवस पर राष्ट्रीय महासचिव डॉ. बिपिन कुमार ने हिंदी को यूएन की आधिकारिक मान्यता दिलाने का संकल्प दोहराया।
विज्ञप्ति पढ़ेंहिंदी पखवाड़े पर दूरदर्शन से बातचीत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन पर डॉ. बिपिन कुमार के विचार।
विवरण देखेंवियतनाम 2024
दोहरा विश्व रिकॉर्ड
फिजी 2018
साहित्य सम्मेलन, पटना
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