हिंदी आज केवल भारत की राष्ट्रभाषा नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में 150 से अधिक देशों में बोली, समझी और पढ़ी जाने वाली भाषा बन चुकी है। विश्व के अनेक प्रमुख विश्वविद्यालयों में हिंदी शोध पीठ स्थापित हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को 7वीं आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाना हमारे जीवन का प्रमुख ध्येय है। विश्व हिंदी परिषद इस संकल्प को लेकर देश-विदेश के विचारकों, राजनयिकों और प्रवासी भारतीयों को निरंतर एकजुट कर रही है। जब तक हिंदी को यह वैश्विक सम्मान नहीं मिलता, हमारी यात्रा अविराम जारी रहेगी।
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