Biography & Profile

जीवन परिचय (About Dr. Bipin Kumar)

डॉ. बिपिन कुमार – राष्ट्रीय महासचिव, विश्व हिंदी परिषद | संरक्षक, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन

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डॉ. बिपिन कुमार

संक्षिप्त प्रोफाइल

नाम: डॉ. बिपिन कुमार

मुख्य दायित्व: राष्ट्रीय महासचिव, विश्व हिंदी परिषद

साहित्यिक संरक्षण: बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना

विशिष्ट सेवा: 15+ वर्ष राष्ट्रभाषा व संस्कृति साधना

वैश्विक मिशन: हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाना

डॉ. बिपिन कुमार

डॉ. बिपिन कुमार एक प्रख्यात स्तंभकार, लेखक, राष्ट्रवादी विचारक और हिंदी भाषा-संस्कृति के अनन्य उपासक हैं। वे विश्व भर में हिंदी को उसका स्वाभाविक और गरिमामयी स्थान दिलाने के लिए विगत 15 से अधिक वर्षों से निरंतर समर्पित हैं।

विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उन्होंने वैश्विक स्तर पर हिंदी सम्मेलनों, शोध संगोष्ठियों और सांस्कृतिक यात्राओं के माध्यम से एक अभूतपूर्व चेतना जागृत की है। वे ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित संस्था 'बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना' के संरक्षक भी हैं, जहाँ से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसी विभूतियों की साहित्यिक परंपरा को जीवंत रखा जा रहा है।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की 'पुस्तक चयन समिति' के सदस्य के रूप में उन्होंने स्तरीय हिंदी साहित्य के संवर्धन एवं सरकारी उपक्रमों में उत्कृष्ट हिंदी पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

भारत सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन एवं फ़िजी में आयोजित 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी कर भारतीय प्रतिनिधिमंडल का गौरव बढ़ाया। इसके साथ ही, वियतनाम (हो चि मिन्ह सिटी), थाईलैंड (बैंकॉक) और कम्बोडिया (नोम पेन्ह) जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलनों के मुख्य संयोजक के रूप में उन्होंने विदेशों में हिंदी की पताका फहराई।

"भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता की आत्मा और राष्ट्र के स्वाभिमान की नींव होती है। जब तक हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ के सर्वोच्च पटल पर गूँज नहीं उठती, तब तक हमारी यह साधना अविराम चलेगी।" — डॉ. बिपिन कुमार

जीवन एवं कर्म के चार प्रमुख स्तम्भ

डॉ. बिपिन कुमार के बहुआयामी व्यक्तित्व के प्रेरक आयाम

1. राष्ट्रवादी स्तंभकार एवं लेखक

देश के प्रमुख राष्ट्रीय दैनिकों—दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स में समसामयिक, सांस्कृतिक व राष्ट्रीय विषयों पर नियमित और निर्भीक स्तंभ लेखन।

2. अंतरराष्ट्रीय हिंदी दूत

मॉरीशस, फ़िजी, वियतनाम, थाईलैंड और कम्बोडिया तक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का सफल संयोजन, जिससे 'वियतनाम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' द्वारा सम्मानित हुए।

3. संस्थागत नेतृत्व

विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के संरक्षक के रूप में देशभर में हिंदी के साहित्यकारों, प्राध्यापकों और युवाओं को एक सूत्र में पिरोना।

4. योग एवं जीवन-मूल्य चिन्तक

'संपूर्ण योग' एवं 'माइंड पावर' जैसी लोकप्रिय पुस्तकों के माध्यम से आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सनातन जीवन-मूल्यों का व्यवहारिक प्रसार।

प्रमुख दायित्व एवं पद

राष्ट्रीय महासचिव

विश्व हिंदी परिषद — देश एवं विश्व स्तर पर हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के संवर्धन का सर्वोच्च सांगठनिक नेतृत्व।

संरक्षक

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना — ऐतिहासिक व शताब्दी पुरानी साहित्यिक संस्था का मार्गदर्शन एवं संरक्षण।

पूर्व सदस्य, पुस्तक चयन समिति

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार — राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट हिंदी साहित्य की चयन प्रक्रिया में योगदान।

संयोजक एवं भारत सरकार प्रतिनिधि

11वाँ (मॉरीशस) एवं 12वाँ (फ़िजी) विश्व हिंदी सम्मेलन — भारत सरकार के प्रतिनिधि दल के रूप में सफल प्रतिनिधित्व।

साहित्यिक एवं सांगठनिक यात्रा के प्रमुख पड़ाव

2024

वियतनाम अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन & दोहरा रिकॉर्ड

हो चि मिन्ह सिटी में ऐतिहासिक सम्मेलन का सफल मुख्य संयोजन। 'वियतनाम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' द्वारा एक साथ सम्मानित।

2018

12वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन – नादी, फ़िजी

भारत सरकार के प्रतिनिधि दल के सम्मानित सदस्य के रूप में प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के प्रवासी भारतीयों के बीच हिंदी का प्रचार।

2015

11वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन – पोर्ट लुई, मॉरीशस

मॉरीशस में आयोजित महासम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में सहभागिता और वैश्विक कार्ययोजना का निर्माण।

2005 - 2010

दिनकर सम्मान एवं राष्ट्रीय साहित्यिक चेतना

राष्ट्रकवि दिनकर सम्मान से अलंकृत। 'हिंदी और समाज', 'संपूर्ण योग' पुस्तकों का प्रणयन एवं देशव्यापी स्तंभ लेखन का सूत्रपात।

डॉ. बिपिन कुमार के विचारों और कृतियों को जानें

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