मॉरीशस, फ़िजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद से लेकर अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैले हमारे प्रवासी बंधु भारतीय संस्कृति और हिंदी के सबसे बड़े ध्वजवाहक हैं।
11वें व 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन के अनुभवों ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रवासी भारतीयों का अपनी मातृभाषा के प्रति अनुराग अगाध है। हमें आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से उनकी भावी पीढ़ी को हिंदी से जोड़े रखना होगा।
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